हरसी डैम मध्य प्रदेश के ग्वालियर और शिवपुरी जिले की सीमाओं के मध्य  मिट्टी से बना मानव निर्मित एशिया का पहला बांध है जिसमें सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। जो पार्वती नदी और उसकी सहयोगी नदियों पर बना है। ग्वालियर राज्य में यह बांध आज भी कई हेक्टेयर जमीन को सिंचित करता है। इस डैम में कोई भी बड़ा गेट नहीं है। नहर के किनारे से पानी निकालने की जगह है। अगर ज्यादा पानी भरा हो तो ऊपर के रास्ते से ओवरफ्लो पानी निकालकर फेंक दिया जाता है।  हरसी डैम बरसात के मौसम में खूबसूरत झरने और पिकनिक के रूप में दिखाई देता है। इस डैम का निर्माण महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के समय 1928 - 1935  में हुआ था। 

 हरसी बांध की मुख्य जानकारी

 * एशिया में : हरसी बांध एशिया का मिट्टी और गारे से बने बांधों में से एक है 

  * एशिया में : हरसी बांध एशिया मैं अपनी अनोखी संरचना के लिए जाना जाता है इसमें सीमेंट का इस्तमाल नहीं किया गया है

* निर्माण: इस बांध का निर्माण सिंधिया शासनकाल के दौरान महाराजा जीवाजीराव सिंधिया के समय 1928 से 1935 के बीच हुआ था। 

* नदी: हरसी बांध पार्वती नदी पर बना हुआ है

* मानसून में (बरसात के मौसम): बारिश के मौसम में जब बांध पूरा भर जाता है तब इसके पानी के निकास के लिए गेट खोल दिए जाते हैं आप फोटो देख सकते हैं 

                    लेकिन जब पानी बहुत ज़्यादा हो जाता है और डैम के गेट से पानी की निकासी नहीं हो पाती है तब ये हरसी डैम के वेस्टबियर से निकलना चालू हो जाता है जो बहुत ही सुंदर दिखता है फोटो में आप देख सकते हैं कि वो कितना सुंदर दिख रहा है
* प्राकृतिक सुंदरता: इस दौरान चारो तरफ हरियाली फैल जाती है और बहता हुआ पानी पर्यटकों को आकर्षित करता है

*दूरी:  हरसी बांध की दूरी

          ग्वालियर से 80 km

          भितरवार से 25 km

          शिवपुरी से 55 km

           नरवर से 15 km

*घूमने का सही समय : हरसी बांध को घूमने का सही समय बरसात का मौसम है क्योंकि इस समय यहां बहुत ही प्यारा मौसम हो जाता है बांध पूरा भर जाता है गेट खुल जाते हैं और ओवरफ्लो पानी भी निकलने लगता है


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